August 2, 2020

Panchatantra stories in Hindi with moral | Panchatantra क्या हैं ?

panchatantra stories in hindi

Panchatantra stories in Hindi: हम जब छोटे थे तब हमे कहानिया सुनना बोहोत अच्छा लगता था। उस वक़्त कहानिया हमे दादी सुनाया करती थी या माँ। जब हम पढना सीखे किताबो में कहानिया पढने लगे, फिर TV में तरह के program आने लगे। जो आज भी याद करके अपना बचपन ताजी हो जाती हैं।

क्या आपको पता हैं, जो कहानिया हमे ज्यादा अच्छी लगती हैं और साथ में अच्छी अच्छी बाते भी सिखने मिलता हैं वह कहा से आता हैं। अगर आपको कोई संदेह हैं तो आप सही जगह आये हैं। आज हमलोग बात करने वाले हैं- महान नितिकथा पंचतंत्र के बारे में और Hindi Panchatantra short stories with moral के बारे में भी।

पंचतंत्र एक संस्कृत भाषा में लिखा गया दंतकथाओं का समूह है। पंचतंत्र को विष्णु शर्मा के द्वारा लिखा गया हैं। यह किसी को नही पता की संग्रह किया गया इन कहानीओ का मूल स्रोत क्या हैं। पर इतिहास में उल्लेख किया गया हैं की 6 वीं शताब्दी में Persian राजा Khosru Anorshirban ने इनका फारसी में अनुवाद कराया था।

ऐसे ही Panchatantra stories in Hindi की प्रचलन होती आयी हैं। अब भिन्न भिन्न भाषाओ में इसका अनुबाद किया जा चूका हैं। दुनिया के कोई भी लोग इसे पढ़ सकते हैं और इस कहानी के द्वारा बताये गए उपदेश को अपने जीवन में संलग्न कर के एक बहतर ज़िन्दगी बना सकते हैं।

Panchatantra stories in Hindi

अब आइये नजर डालते हैं कुछ Hindi Panchatantra short stories with moral के ऊपर जो बचपन में खूब शौख से सुनते थे और हमे बोहुत अच्छा लगता था।

लोमड़ी और कौवा

(Small Panchatantra stories in Hindi) बहुत पुराने एक बात हैं। एक कौवा अपनी भौजन के तलाश में इधर उधर भटक रहा था पर उसे कही भी भौजन ना मिला। वह थका हरा जाके एक पेड़ में जाके बैठा, तभी उसे एक प्लेट में रोटी के कुछ तुकरे पढ़ा हुआ दिखाई दिया। उसने जाके झट से रोटी के तुकरे को अपनी चोंच में उठाई और वापस पैर पे जा बैठे।

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कौवा भौजन करने ही वाले था उसी समय वहा पे एक चालाक लोमड़ी आया और कौवा को कहा की उसकी आवाज बोहोत ही प्यारी और सुरमई हैं। ऐसे ही कौवे के आवाज की तारीफ करने लगी। झूठ मुझ बातो से मन बहलाने की कोशिश किया। कौवा भी अपनी आवाज की तारीफ सुनके बोहुत अच्छा लगा।

अंत में चतुर लोमड़ी के चालाक झूठी बातो में आकर बेवकूफ कौवा अपनी आवाज को इतनी अच्छी समझ बैठी की उसे सुनाने के लिए अपनी मुह खोल के kaaa।।। kaaa।।। बोल परी और मुह से वह रोटी के तुकरे निचे गिर गया। कौवा को पता चलता की उसके साथ धोखा हुआ हैं, तबतक लोमड़ी वहा से कौवे की भौजन को लेके जा चूका होता हैं। अब कौवा उदाश और भूका अपनी किये पे पस्ता रहा हैं।

यहाँ से हमे यह सिखने मिलते हैं की-

चापलूसों से हमे सदा बचके रहना चाहिए और इनका कभि विश्वास नही करना चाहिए।

फुटा घड़ा

एक गाँव में श्याम नाम का एक किसान रहता था। उसके घरके सामने ही एक खेत की जमीन थी। वह हर रोज घर के लिए पानी लाने अपनी खेत से पास से ही गुजरता एक रास्ते से जाता था। किसान अपनी दो मटकियो में पानी भर कर कंधो में लाता था। उन दो मटकियो में से एक मटकी में एक छेद था, जिससे घर आधा पानी ही आ पाता था।

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इसी वजह से वह मटकी हमेशा दुखी और सर्मिन्दा रहता था, की उनमे पूरी पानी घर लेन की क्षमता नही हैं। पर दूसरा मटकी पूरा पानी घर ला पाने के वजह से खुद पे बोहुत गर्भ करता था। हुए मटके को ताना मारता था की वह किसान की कोई मदद नही कर रहा हैं, बल्कि उनका महनत बेकार जाने दे रहा हैं।किसान उन दोनों की बातो को सुन रहा था, तभी उन्होंने फुटा घड़ा को कहा की वह खुद को यू ही दोषी समझ बठे हैं।

वह टुटा फुट हैं मगर पानी लेन के साथ साथ और भी अछे काम कर रहे हैं। जब नदी से पानी भर कर घर लौटते रहे होते हैं तब फूटी हुई घड़ा से निकलता हुआ पानी फूलो के पौधों में गिर जाता हैं। जिससे पौधा जल्दी बढ़ता हैं और फूल देने लगता हैं। उस फुल को बाजार में बेचा जाता हैं, जिससे घर की आमदानी बढ़ती हैं। किसान की यह बात सुनकर फुटा घड़ा को बहुत अच्छा लगा और हमेशा ख़ुशी से रहने लगे।

इस Small Panchatantra stories in Hindi से हमे यह सिखने को मिला हैं की-

हमे किसी की कमजुरी का फ़ायदा उठाते हुए उसका मजाक नही उड़ाना चाहिए। बल्कि उनके अच्छे गुणों का हमे प्रसंशा करनी चाहिए।


मुर्ख पंडित

एक गाँव मे सोमेश्वर नाम का एक गरीब पंडित था। सोमेश्वर माँ दुर्गा का एकांत भक्त था। वह अपने गुरु के द्वारा बताये गए उपदेश को मानते हुए माँ दुर्गा की तपस्या करने एक घने जंगल में चला गया और दुर्गा माँ के भक्ति में बिलीन हो गया। प्रकिती का धुप, बारिश, हवा आदि का सामना करते हुए अपने भक्ति में मगन रहे।

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पंडित सोमेश्वर की एकाग्रता को देख कर माँ दुर्गा पसन्न हुआ और उसके सामने प्रकट हुआ। उसे क्या बरदान चाहिए मांगने हो कहा, तब पंडित ने संजीवनी बूटी को माँगा। दुर्गा माँ उसके हाथ में संजीवनी बूटी देते हुए कहा की जिस किसी भी मृत प्राणियो के ऊपर इस संजीवनी बूटी का रस चिरकेगा वह पहले जैसा जीवित और शक्तिशाली बन जायेगा।

यह संजीवनी बूटी कभि सूखेगा नही और ख़त्म नही होगा। यह कह के दुर्गा माँ वह से अदृश्य हो गया।सोमेश्वर को संजीवनी बूटी पाकर ख़ुशी से अपनी घर की तरफ जा रहा था। तभी उन्हें ख्याल आया, की दुर्गा माँ ने संजीवनी बूटी दिया हैं वह सच में काम करता हैं या उसे बेबकुफ़ बना गई। इसको लेके उनके मन में संदेह भाव का प्रकट हुआ।

इसीलिए, मरे हुए को संजीवनी बूटी से जिन्दा किया जा सकता हैं या नही वह अपनी आँखों से एक बार देख लेना चाहता था। वह सोचते हुए कुछ ही दूर जाने के बाद उन्हें एक मरा हुआ शेर दिखाई दिया। पंडित को मरा हुआ शेर देख कर तुरंत संजीवनी बूटी का प्रयोग मरा हुआ शेर के ऊपर किया। ताकि वह देख पाए की संजीवनी बूटी असरदार हैं या नही।

जब संजीवनी बूटी का प्रभाव शेर के उपर परा, वह तुरंत जिंदा हो गए और पहले जैसे शक्तिशाली बन गए। इतने दिन से मृत शेर जिंदा होने के बाद वह बहुत भूका था। ऐसे में उसे इन्सान की गंध मिली। उस जगह पर पंडित सोमेश्वर के आलावा और कोई नही था। भूखा शेर पंडित को देखते ही दबोच लिया और खा गए। पंडित सोमेश्वर अपनी मुर्खता के कारन जीवन गवा दिया।

इस Panchatantra short stories with moral से हमे यह सिखने मिलते हैं की-

हमे किसी भी कार्य करने से पहले ठीक से सोच लेना चाहिए। अन्यथा इसका परिणाम बुरा भी हो सकता हैं।

Conclusion: आज का यह लेख- Panchatantra क्या हैं, Panchatantra stories in Hindi, Hindi Panchatantra short stories with moral के ऊपर था। आप लोगो को कैसा लगा comment में जरुर अपना अनुभव share कीजियेगा। अपने दोस्तों के साथ भी share कीजियेगा। धन्यवाद।


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Shreshtha

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